शनिवार, 17 सितंबर 2022

शंकर दास की कविता - पहाड़ों से टकराना सीखो।


चलना सिखों ,उड़ना सीखो

पहाड़ों से टकराना सीखो

विषम परिस्थिति में जिन्दगी जीना ही जिंदगी है

कयामत से भी लड़ना सीखो

चलना सीखो उड़ना सीखो

पहाड़ों से टकराना सीखो।


जिन्दगी भी अपने आप में गजब की एक कहानी है

बिन मेहनत जो मिल जाए फल नहीं वो पानी है

कामयाबी की तकदीर को कलम से अपना खुद ही लिखो

चलना सीखो उड़ना सीखो

पहाड़ों से टकराना सीखो।


भेद न लेना लक्ष्य को जब तक शिखर के अंतिम चरण को जानना

सारी दुनिया कुछ भी कह दे अपने आप में हार ना मानना

सोच को सच में तब्दील करना दशरथ मांझी से सीखो

चलना सीखो उड़ना सीखो

पहाड़ों से टकराना सीखो। 

लेखक - शंकर दास 


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